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ज्यादा सोने से क्या होता है 

नींद (Sleep) हमारे स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक है। एक सामान्य व्यक्ति को अच्छे Health के लिए 6-8 घंटे सोना जरुरी है। कुछ लोग इससे कम सोकर भी तरोताज़ा रहते हैं जैसे कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी। नींद कम लेना या जरुरत से ज्यादा सोना (Oversleeping) दोनो ही सेहत के लिए हानिकारक माना गया है।

1) शरीर में आलस बना रहना –

ज्यादा सोने का एक सबसे बड़ा नुकसान ये है कि व्यक्ति के शरीर में अनावश्यक आलस बना रहता है। आइए ज्यादा सोने से होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानिए।

2) दिमाग पर पड़ता है बुरा असर –

वैज्ञानिकों ने एक स्टडी में पाया कि आवश्यकता से अधिक सोने वाले लोगो में टेंशन, डिप्रेशन का शिकार होने की सम्भावना अधिक होती है. 9 घंटे से ज्यादा सोने से दिमाग की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है, दिमाग सुस्त होने लगता है. अच्छे मानसिक स्वास्थ्य (Mental health)  के लिए थकान लगने पर सोना चाहिए और अनावश्यक सोने, आलस करने से बचना चाहिए.

3) औरतों ध्यान दें –

अधिक सोने वाली स्त्रियों की गर्भधारण क्षमता प्रभावित होती है. वैज्ञानिकों के अनुसार इस स्लीप पैटर्न से हार्मोन स्राव, मेंसट्रूअल साइकिल प्रभवित होता है, जिससे फर्टिलिटी (Fertility) घट सकती है.

4) बीमारियों को निमंत्रण –

ज्यादा सोना शरीर में ब्लड-शुगर लेवल को असंतुलित करता है, जिससे Type 2 Diabetes बीमारी हो सकती है. अधिक सोने वाले व्यक्ति हृदय की बीमारी जैसे कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट स्ट्रोक, एनजाइना का भी शिकार हो सकते हैं.

5) मोटापा और वजन बढ़ना –

वजन बढ़ने और ज्यादा सोने का तो सीधा सम्बन्ध है. सोते समय हमारी सभी उपापचय क्रियाएँ (Metabolism) धीमी पड़ जाती है. सोने में शरीर की बहुत कम ऊर्जा खर्च होती है, जिससे कम कैलोरीज बर्न होती है. फलतः अनावश्यक Fat शरीर में बढ़ने लगता है.

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7) अधिक सोना मतलब जल्दी मृत्यु –

एक आश्चर्यजनक तथ्य यह पाया गया कि ज्यादा सोने वालों की मृत्यु अपेक्षाकृत जल्दी होती है. तो ये वहम आप मन से निकाल दें कि ज्यादा सोने से लोग लम्बी उम्र पा सकते हैं. लम्बी उम्र पाने वाले दुनिया के कई बुजुर्गों ने अपनी लम्बी उम्र का राज सक्रिय और संतुलित जीवन बताया है.

8) शरीर का सिस्टम डिस्टर्ब –

अनावश्यक सोना हमारे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक की प्रणाली को असंतुलित करता है. जिसके दुष्परिणाम आलस बना रहना, सुस्ती, मूड खराब होना, सरदर्द, पीठदर्द, थका-थका सा अनुभव करने के रूप में सामने आते हैं.

9) फालतू सपने आना –

आयुर्वेद के अनुसार किसी भी नियम, वस्तु का असंतुलित पालन, उपयोग बीमारी को आमंत्रण देता है. अनावश्यक सोने से सपने भी अधिक आते हैं और सपने आना (Dreams) अच्छी नींद का लक्षण नहीं माना जाता. अच्छी नींद का मतलब होता है कि जब आँख खुले तो आप अपने आप को तरोताजा महसूस करें.

सोने के घंटे कम करने के लिए क्या करें –

खाना समय से खाएं, रात का खाना बहुत गरिष्ठ न हो, प्रतिदिन व्यायाम करें, सोने और भोजन के बीच में अन्तराल हो – ये नियम एक स्वस्थ नींद के सहायक हैं। दिन में पानी खूब पियें। गहरी सांस लेने वाले योग, व्यायाम नियमित करें। अधिकतर लोग आदतवश ज्यादा सोते (Oversleeping) हैं, जिसे 15-20 दिन में धीरे-धीरे कम करते हुए सामान्य, स्वस्थ नींद के स्तर पर लाया जा सकता है।

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