हिंदी साहित्य में सर्वप्रथम
खड़ी बोली में साहित्यिक रूप का सर्वप्रथम प्रयोग रामप्रसाद निरंजनी भाषा योग वशिष्ठ में।
खड़ी बोली के प्रथम महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध।
खड़ी बोली के प्रथम स्वच्छंदतावादी कवि श्रीधर पाठक।
खड़ी बोली को सर्वप्रथम हिंदुस्तानी नाम से पुकारने वाले स्वामी प्राणनाथ।
स्वच्छंदतावाद शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग श्लेगर जर्मन आलोचक मुकुटधर पांडे पांडे हिंदी में।
गीतिकाव्य शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग लोचन प्रसाद पांडेय कुसुमन माला की भूमिका में।
छायावाद की प्रथम कृति झरना 1918 जयशंकर प्रसाद।
आचार्य शुक्ल अनुसार छायावाद का प्रथम प्रतिनिधि कवि सुमित्रानंदन पंत।
मुक्त छंद के प्रथम प्रयोगकर्ता निराला जूही की कली कविता में।
प्रसाद की प्रथम काव्य कृति उर्वशी 1909।
प्रसाद की प्रथम छायावादी काव्य कृति झरना 1918।
महादेवी का प्रथम काव्य संग्रह निहार 1930 ।
प्रयोगवाद शब्द का प्रथम प्रयोग नंददुलारे वाजपेई।
हिंदी की प्रथम दीर्घ कविता परिवर्तन सुमित्रानंदन पंत।
अज्ञेय का प्रथम काव्य संग्रह भग्नदूत ।
हिंदी का प्रथम उपन्यास लाला श्रीनिवास दास कृत परीक्षा गुरु।
जैनेंद्र का प्रथम उपन्यास परख।
इलाचंद्र जोशी का प्रथम उपन्यास घृणामयी।
हिंदी का प्रथम नाटक नहुष गोपाल चंद्र गिरधर दास कृत भाषा ब्रज।
हिंदी का प्रथम अभिनीत नाटक जानकी मंगल शीतला प्रसाद त्रिपाठी कृत।
हिंदी का प्रथम एकांकी एक घूंट जयशंकर प्रसाद कृत।
हिंदी की प्रथम मौलिक कहानी इंदुमति किशोरीलाल गोस्वामी कृत।
हिंदी का प्रथम रेडियो नाटक राधा कृष्ण।
हिंदी का प्रथम रेखाचित्र लक्ष्मीपुरा शिवदान सिंह चौहान कृत।
प्रथम गद्य काव्य के लेखक भारतेंदु।
गुलेरी की प्रथम कहानी सुखमय जीवन।
हिंदी के प्रथम आलोचक बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघन।
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