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गंगा नदी के रोचक और अद्भुत तथ्य

यह भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर 2525 किलोमीटर (कि॰मी॰) की दूरी तय करती हुई उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुन्दरवन तक विशाल भू-भाग को सींचती है.

 

भारत में पवित्र नदी भी मानी जाती है तथा इसकी उपासना माँ तथा देवी के रूप में की जाती है.

 

गंगा नदी में मछलियों की 140 प्रजातियाँ, 35 सरीसृप तथा इसके तट पर 42 स्तनधारी प्रजातियाँ पायी जाती हैं.

 

भारत सरकार के द्वारा गंगा नदी को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया है.

 

गंगा नदी की प्रधान शाखा भागीरथी है जो कुमायूँ में हिमालय के गौमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती हैं.

 

गंगा नदी पर निर्मित अनेक बाँध — फ़रक्का बाँध, टिहरी बाँध, तथा भीमगोडा बाँध, भारतीय जन-जीवन तथा अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण अंग हैं. इनमें प्रमुख हैं

 

गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊँचाई 3140 मीटर

 

गंगा इलाहाबाद के प्रयाग में यमुना नदी से संगम होता है. इसे तीर्थराज प्रयाग कहा जाता है.

 

ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह ज्ञात होता है कि 16वीं तथा 17वीं शताब्दी तक गंगा-यमुना प्रदेश घने वनों से ढका हुआ था.

 

गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के मिलन स्थल पर बनने वाले मुहाने को सुन्दरवन के नाम से जाना जाता है.

 

गंगा नदी पर बना विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा (सुन्दरवन) बहुत-सी प्रसिद्ध वनस्पतियों और प्रसिद्ध बंगाल टाईगर का निवास स्थान है.

 

गंगा के तटीय क्षेत्रों में दलदल तथा झीलों के कारण यहाँ लेग्यूम, मिर्च, सरसो, तिल, गन्ना और जूट की बहुतायत फसल होती है.

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा का स्वर्ग से धरती पर आगमन हुआ था.

 

पुराणों के अनुसार स्वर्ग में गंगा को मन्दाकिनी और पाताल में भागीरथी कहते हैं.

 

गंगा के किनारे ही रहकर महर्षि वाल्मीकि ने महाग्रंथ रामायण की रचना की थी.

 

पूरी दुनिया में केवल गंगा नदी ही एकमात्र नदी है, जिसे माता के नाम से पुकारा जाता है.

 

ऋग्वेद, महाभारत, रामायण एवं अनेक पुराणों में गंगा को पुण्य सलिला, पाप-नाशिनी, मोक्ष प्रदायिनी, सरित्श्रेष्ठा एवं महानदी कहा गया है. संस्कृत कवि जगन्नाथ राय ने गंगा की स्तुति में ‘श्रीगंगालहरी’ नामक काव्य की रचना की है.

 

गंगाजल की एक विशेषता यह है कि गंगा का पानी कभी सड़ता नहीं है.

 

गंगाजल में कभी दुर्गन्ध नहीं आती, इसीलिए लोग गंगाजल को अपने घरों में हमेशा रखते हैं.

 

भारतीय हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की, यदि किसी को मृत्यु के समय गंगाजल पिलाया जाए तो मरने वाले व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

 

भारत में हर शुभ कार्य के लिए गंगा जल का प्रयोग किया जाता है.

 

मन्दिरों में जो चरणामृत के रूप में दिया जाता है वह गंगाजल ही होता है.

 

अमेरिका को खोजने वाला कोलंबस गंगा की तलाश में भटकते हुए मार्ग खो बैठा था.

 

‘आइने अकबरी‘ में लिखा है कि बादशाह अकबर पीने के लिए गंगाजल ही प्रयोग में लाते थे. इस जल को वह अमृत कहते थे.

 

वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि गंगा के पानी में ऐसे जीवाणु हैं जो सड़ाने वाले कीटाणुओं को पनपने नहीं देते, इसलिए पानी लंबे समय तक ख़राब नहीं होता.

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गंगाजल में बेक्टेरियोफेज नामक एक बैक्टीरिया पाया गया है जो पानी के अंदर रासायनिक क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अवांछनीय पदार्थों को खाता रहता है. इससे जल की शुद्धता बनी रहती है.

 

गंगा के पानी में गंधक की प्रचुर मात्रा मौजूद रहती है; इसलिए गंगाजल ख़राब नहीं होता.

 

कुछ भू-रासायनिक क्रियाएं भी गंगाजल में होती रहती हैं, जिससे इसमें कभी कीड़े पैदा नहीं होते.

 

वैज्ञानिक परीक्षणों से पता चला है कि गंगाजल से स्नान करने तथा गंगाजल को पीने से हैजा प्लेग, मलेरिया आदि रोगों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं.

 

डॉ. हैकिन्स ने गंगाजल के परिक्षण के लिए गंगाजल में हैजे कालरा के कीटाणु डाले, लेकिन हैजे के कीटाणु मात्र 6 घंटें में ही मर गए और जब उन कीटाणुओं को साधारण पानी में रखा गया तो वह जीवित होकर अपने असंख्य में बढ़ गया. इस तरह देखा गया कि गंगाजल विभिन्न रोगों को दूर करने वाला जल है.

 

डॉ. हैरेन ने गंगाजल से ‘बैक्टीरियासेपफेज‘ नामक एक घटक निकाला, जिसमें औषधीय गुण हैं.

 

इ्ंगलैंड के चिकित्सक सी. ई. नेल्सन ने गंगाजल पर अनुसंधान करते हुए लिखा है कि गंगाजल में सड़ने वाले जीवाणु ही नहीं होते.

 

1950 में रूसी वैज्ञानिकों ने हरिद्वार एवं काशी में स्नान के बाद ही कहा था कि उन्हें स्नान के बाद ही ज्ञात हो पाया कि भारतीय गंगा और गंगाजल को इतना पवित्र क्यों मानते हैं.

 

चमत्कृत हैमिल्टन समझ ही नहीं पाए कि गंगाजल की औषधीय गुणवत्ता को किस तरह प्रकट किया जाए.

 

गंगा नदी में मछलियों और सर्पों की अनेक प्रजातियाँ तो पायी ही जाती हैं, मीठे पानी वाले दुर्लभ डॉलफिन भी पाये जाते हैं.

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इलाहाबाद और हल्दिया के बीच 1600 किलोमीटर गंगा नदी जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया है.

 

गंगाजल से हैजाऔ र पेचिश जैसी बीमारियाँ होने का खतरा बहुत ही कम हो जाता है.

 

वैज्ञानिक जाँच के अनुसार गंगा का बायोलॉजिकल ऑक्सीजन स्तर 3 डिग्री से बढ़कर 6 डिग्री हो चुका है.

 

गंगा में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा प्रतिदिन गिरया जा रहा है.

 

गंगा नदी के साथ अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं.

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